Sunday, September 20, 2009

जब मै भी युवा था .............युवा ?

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दोस्तों ..........गुड........ मोर्निंग , इविनिंग एंड आफ्टरनून ! इस शीर्षक को देख कर आपको भी शायद आश्चर्य हो रहा हो कि बाईस साल का एक युवक ये क्यों बोल रहा कि ........जब मै युवा था ? जीवन के तमाम पहलुओं को लांघते हुए मै जब तीन साल पहले कि ज़िन्दगी में जाता हूँ तो दिल मेरा ध्यान भंग करते हुए बोल पङता है कि " जब मै युवा था "! "नवोत्पल" मेरे सपनों का नवोत्पल ........आज एक सपने ज्यादा कुछ नहीं !कहावत है सपने देखो क्योंकि सपने ही साकार होते है लेकिन मेरे साथ ठीक उल्टा "जो साकार होकर भी आज किसी सपने से कम नहीं है "!

आज के तीन साल पहले जब मै बी.ए का विद्यार्थी था ..........क्या जोश था तब ...क्या जूनून और क्या ज़ज्बा जो आज मेरे लिए खुद से सवाल बन गया है ...........एक सवाल ?आज भी मै अनुत्तरित हूँ खुद से पूछे उस सवाल पर कि आखिर क्या मेरे पास नहीं रहा कि मै अपने नवोत्पल को संभाल कर नहीं रख सका ? उत्तर मिलता है वो काम करने जिद , वो जुनून और वो विपरीत परिस्थितियों से लड़ने कि ताकत ............जो अब शायद नहीं रहीं मुझमे ! "नवोत्पल" के बारे में अगर कुछ कहूँ तो नवोत्पल एक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था थी जो शुरू तो एक हाथ से कि गयी लेकिन चंद दिनों में हजारों हाथों ने उसे थाम लिया !नवोत्पल भी युवा संघर्षों कि ही उपज थी उस समय बड़े मंचो पर चाहे वो साहित्यिक हो या सांस्कृतिक, आइकन साहित्यकारों एवं कलाकारों को ही स्थान दिया जाता था और तमाम युवा प्रतिभाएं उपेक्षित हो रहीं थी ! इसी संघर्ष के परिणाम स्वरुप खड़ी हुई नवोत्पल कि दीवार ! नवोत्पल , युवाओं के मंच के रूप में जाना जाने लगा ! न जाने कितने युवा साहित्यकारों , कलाकारों को मंच मिल गया जो कभी अपनी रचनाओं को मन में ही गुनगुनाते थे क्योंकि उनके पास मंच नहीं था !तमाम परेशानियों से जूझते हुए हमने यह निश्चय किया नवोत्पल का पहला स्थापना समारोह बुद्ध पी.जी कालेज के सभागार में कराया जाय ! हमारी जेबें बहुत छोटी थीं लेकिन दिल उतना ही बड़ा था ,ज़ज्बा उतना ही अडिग था , सब कुछ अकेले कर देने का जूनून था ! इन सबका साथ जेहन में कुछ ऐसा था कि तमाम विषम परिस्थितियों के बावजूद कार्यक्रम कि मूलभूत तैयारियां पूरी कर लीं गयीं ! कार्यक्रम हुआ और ऐसा हुआ कि लोग देखते रह गए पुरे छ: घंटे अपने रंग में चला कार्यक्रम ! उस स्टेज से निकला कोई आज एल्बम निकाल कर सिंगर बन चुका है तो कोई भोजपुरी फिल्म कलाकार ! वह नवोत्पल का स्थापना समारोह था और उसी समारोह में यह घोषणा कि गयी कि नवोत्पल का अगला कार्यक्रम छ: महीने बाद फिर आयोजित होगा और शिवानन्द द्विवेदी इसके भावी अध्यक्ष होंगे ! मै आज भी इस बात को लेकर भ्रमित हूँ कि क्या वो कार्यक्रम सच में स्थापना समारोह था ..................स्थापना समारोह ? क्योंकि वही नवोत्पल का अंतिम समारोह भी था ! क्योंकि किन्ही कारणों से मेरा नवोत्पल अंतिम सांसे ले चुका था और उसमे एक कारण मै भी था ! मै उसे संभाल नहीं सका , मेरे अन्दर उतना जुनून नहीं रहा , वो फौलादी ज़ज्बा नहीं रहा , काम को अंजाम तक पहुचाने का वो उन्माद नहीं रहा , दिल में जिद पालने कि ताकत नहीं रही ..................अगर इनमे से एक भी मेरे अन्दर होता तो मेरा नवोत्पल मेरे पास होता ! इतने के बाद भला मै कैसे कहूँ कि " मै युवा हूँ " क्योंकि युवा कभी हारते नहीं जो हार गया वो युवा नहीं ! मै तो अपना नवोत्पल हार चुका हूँ इसलिए मै यही कहूंगा " जब मै युवा था ............युवा ?"

यह बात मै yuthपाठशाला के ब्लॉग पर इसलिए लिखा क्योंकि इस पाठशाला में आज भी युवा हैं जो हार कर भी जीतना जानतें है , जो जिद को पालना जानते हैं , ज़ज्बे को संभालना जानते हैं ! जुड़ा हूँ इन लोगों से कि शायद मेरे अन्दर भी कोई जवानी जाग जाये वरना मै तो युवा था ही ! धन्यवाद


नाव छोटी ही सही मझधार तक जाती तो है ,

हवा हलकी ही सही पर्वत से टकराती तो है ,


एक चिनगारी कहीं से ढूंढ़ लाओ दोस्तों ,

इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो है !

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