हम यहाँ क्या करने आये थे क्या कर बैठे ,
कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे ,
हमसे अच्छे तो वो परिंदे हैं जो ,
कभी मंदिर पे जा बैठे कभी मस्जिद पे जा बैठे................
एक नया जोश एक नया जुनूं एक नयी कहानी चलती है इतिहास उधर मुड़ जाता है जिस ओर जवानी चलती है क्योंकि we are youth और जहां हम, वहीं हमारी पाठशाला
No comments:
Post a Comment